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वे सभी सुसमाचार का पालन नहीं करते हैं

  वे सभी सुसमाचार का पालन नहीं करते हैं   ( रोमियों 10:14-21) फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया , वे उसका नाम क्योंकर लें ? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें ? और प्रचारक बिना क्योंकर सुनें ? और यदि भेजे न जाएं , तो क्योंकर प्रचार करें ? जैसा लिखा है , कि उन के पांव क्या ही सुहावने हैं , जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं।   परन्तु सब ने उस सुसमाचार पर कान न लगाया : यशायाह कहता है , कि हे प्रभु , किस ने हमारे समाचार की प्रतीति की है ?   सो विश्वास सुनने से , और सुनना मसीह के वचन से होता है।   परन्तु मैं कहता हूं , क्या उन्होंने नहीं सुना ? सुना तो सही क्योंकि लिखा है कि उन के स्वर सारी पृथ्वी पर , और उन के वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं।   फिर मैं कहता हूं। क्या इस्त्राएली नहीं जानते थे ? पहिले तो मूसा कहता है , कि मैं उन के द्वारा जो जाति नहीं , तुम्हारे मन में जलन उपजाऊंगा , मैं एक मूढ़ जाति के ...