संदेश

अक्टूबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैं पुनरुत्थान और जीवन हूँ

  मैं पुनरुत्था न और जीवन हूँ   ( यूहन्ना ११ : १७ - २६ ) सो यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं।   बैतनिय्याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था।   और बहुत से यहूदी मारथा और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्ति देने के लिये आए थे।   सो मारथा यीशु के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई , परन्तु मरियम घर में बैठी रही।   मारथा ने यीशु से कहा , हे प्रभु , यदि तू यहां होता , तो मेरा भाई कदापि न मरता।   और अब भी मैं जानती हूं , कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा , परमेश्वर तुझे देगा।   यीशु ने उस से कहा , तेरा भाई जी उठेगा।   मारथा ने उस से कहा , मैं जानती हूं , कि अन्तिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह जी उठेगा।   यीशु ने उस से कहा , पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं , जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए , तौभी जीएगा।   और जो कोई जीवता है , और म...