तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है।
( २ कुरिन्थियों ४ : १४ - १८ ) क्योंकि हम जानते हैं , जिस ने प्रभु यीशु को जिलाया , वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा , और तुम्हारे साथ अपने साम्हने उपस्थित करेगा। क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं , ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक होकर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए॥ इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते ; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नाश भी होता जाता है , तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं , क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं , परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं। " प्रभु यीशु के शरीर में मरना " का अर्थ है कि संत मसीह के साथ मर चुके हैं। हालाँकि , ऐसा इसलिए है क्योंकि उस मृत्यु के बा...