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गेहूँ और टार

『 उस ने उन्हें एक और दृष्टान्त दिया कि स्वर्ग का राज्य उस मनुष्य के समान है जिस ने अपने खेत में अच्छा बीज बोया।   पर जब लोग सो रहे थे तो उसका बैरी आकर गेहूं के बीच जंगली बीज बोकर चला गया।   जब अंकुर निकले और बालें लगीं , तो जंगली दाने भी दिखाई दिए।   इस पर गृहस्थ के दासों ने आकर उस से कहा , हे स्वामी , क्या तू ने अपने खेत में अच्छा बीज न बोया था फिर जंगली दाने के पौधे उस में कहां से आए ?   उस ने उन से कहा , यह किसी बैरी का काम है। दासों ने उस से कहा क्या तेरी इच्छा है , कि हम जाकर उन को बटोर लें ? उस ने कहा , ऐसा नहीं , न हो कि जंगली दाने के पौधे बटोरते हुए उन के साथ गेहूं भी उखाड़ लो। कटनी तक दोनों को एक साथ बढ़ने दो , और कटनी के समय मैं काटने वालों से कहूंगा ; पहिले जंगली दाने के पौधे बटोरकर जलाने के लिये उन के गट्ठे बान्ध लो , और गेहूं को मेरे खत्ते में इकट्ठा करो॥ 』 (मत्ती 13: 24-30) आज , कई चर्च ग...